Saturday, December 28, 2013

O Lord Rama....

ही बालकविता इंग्रजी मी नर्सरी -हाइम्सला वैतागुन लिहुन संगीतबद्ध केली होती. ही कविता वाचुन आणि संगीत ऐकून हिंदुत्ववाद्यांना आनंदाच्या उकळ्या फुटु शकतील किंवा रामद्वेष्ट्यांना पोटशूळ उठू शकेल...मला मात्र सामान्य जनमानसांतला राम या कवितेत अभिप्रेत आहे...खालच्या शब्दांसोबत जोडलेले संगीत ऐका...


(Chorus "Oh Ram Oh Ram)

I pray to you
I bow before you
O Lord Rama
O lord Rama...(2)

Give me the strength
To seek the truth
The purity of mind
To change the world
Bless me O Lord
O Lord Rama....
I Pray to you...

I wish to make
The world beautiful
free of evil
And Violence
Give me courage
O Lord Rama
I Pray to you...
I bow before you
O Lord Rama...


http://yourlisten.com/sonawani/o-lord-rama

9 comments:

  1. Dear Sanjayji,
    No one can call this poem or rhymes. it is simple text put in multiple lines..
    Rhymes should be in meter and tune.

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  2. Dinesh Sharma Sir,



    You are right

    Here I remember the poem by Ravindranath Thakur



    Into that heaven of freedom my father let my country awake

    I n school days we used to sing the poem in our class



    It is available now on you tube sung and and tuned by some European musician

    the poem is a sweet one

    is it a rhyme or sonnet or just a poem ?

    When I listened the tune ,I was surprised to find that the tune of ours and that of the youtube tune was very much the same

    Will you please help me understanding this ?

    Regards and

    wishing you and all follers of this blog a very promising and healthy new year !

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  3. प्रिय श्री दिनेश शर्माजी

    शुभ प्रणाम ,और एक निवेदन !

    मुझे कविता और पद्य रचनाका बहुत कम ज्ञान है

    मेरे हिसाबासे मीटर का मतलब हम जिसको वृत्त समझते है वो तो नही ?

    शार्दुल विक्रीडीत ,भुजंग प्रयास जैसे कई वृत्त मराठी में प्रस्थापित है ,शायद वह संस्कृत रचना और शास्त्र का परिणाम है और मै जानना चाहुंगा कि क्या यही वृत्त कम अधिक फरकसे बाकी भारतीय भाषाओमेभी प्रचलित है ?

    छंद और वृत्त ये पुर्वासुरी कवियोंकी पहचान थी और अलग अलग भावना के लिये अलग अलग वृत्त प्रचारमे थे जो गेयता ज्ञानेश्वरीमें पायी जाती है वह ओविके कारण है

    आप जिसको मीटर बोल रहे है वो मराठीमे यमक अनुप्रास जैसे प्रकारसे कवितामे अपनी पहचान बनाती है - क्या यह सही है ?

    मेरे खयालमे लोरी गझल और कव्वाली मुजरा का अपना एक अलग मीटर हिंदीमे होता है

    वैसेही मराठीमे लावणी भूपाळी ओवी पोवाडा अभंग के लिये कहा जा सकता है

    आप मुझ जैसे लोगोंको समाझानेमे संजय सरके साथ हमारी मदद करेंगे ऐसी आशा है !

    आपको नव वर्षकी शुभ कामनए

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  4. प्रिय प्रतिभा, प्रिय पृथ्वीराज
    छंद, दोहा, चौपाई, शेर, अभंग या अन्य किसी भी नाम से पुकारिये , किन्तु गीत या रिम्स में लय होना आवश्यक है, अन्यथा वह मुक्तक हो जायेगी. मुक्तक का अर्थ ही है जिसपर कविता का कोई नियम लागु नहीं है. यह लय स्वर की हो सकती है और शब्द की भी.
    रवीन्द्रनाथ की जिस कविता का जिक्र आप कर रही है, वह निम्न मूल बांग्ला कविता का इंग्लिश अनुवाद है.
    चित्त जेथा भयशून्य, उच्च जेथा शिर ,
    ज्ञान जेथा मुक्त जेथा गृहेर प्राचीर
    आपन प्रांगणतले दिवसशर्वरी
    बसुधारे राखे नाइ खण्ड खण्ड क्षुद्रकरि,
    मुक्तक का उपयोग जटिल भावों की अभिव्यक्ति के लिए तो ठीक है किंतु बच्चों के मन के सीधे साधे भाव तो गीत या रिम्स में ही व्यक्त हो सकते है. आज भी मैं मेरे बचपन की प्राथमिक स्कूल की कविताये नहीं भूल पाया हूँ.
    आप मुझसे मेरे ०९३२६८४१९२४ पर बात कर सकते है. क्योंकि गीत कानों के लिए होते है आखों के लिए नहीं.
    दिनेश शर्मा

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    1. Dear Dinesh ji, If you read these lines with the music provided in the link, you will find the ryhme is well lyrical...pls try once!

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  5. वंदनीय शर्मा सरजी ,



    प्रणाम.

    अनुप्रास से हर कविताकी हर पंक्तीमे अंत में एक हि अक्षर आता है

    वह सौंदर्य आनेके साथ साथ उसको अगर वृत्त रचना ,जिसको मराठीमे आर्या ,दिंडी वगैराह कहा जाता है या शार्दुल विक्रीडीत, भुजंग प्रयास - जैसे कि पहलेही पृथ्वीराज साहिबने समझाया है

    राम रामेति रामेति रमे रामे मनो रमे

    सहस्त्र नाम तत तुल्यं राम नाम वरानने

    और

    कूजन्तं राम रामेती रमे रामे मनोरमे

    आरूह्य कविता शाखा वन्दे वाल्मिकी कोकीलम

    या

    शादीके समय जो मंत्र समझाते है - जैसे कि

    स्वस्ति श्री गण नायका गज मुखा -

    यह मेरे हिसाबासे शार्दुल विक्रीडीत है

    मेरा मानना है कि छंद मी रचना करनेसे गीत मुखोद्गत होनेमे सहायता होती है

    और पुरातन कालमे प्रिंटींग कला नही थी तब पाठांतर आवश्यक था

    सरजी,

    आपका मानना बिल्कुल सही है कि आज भी पुराने वृत्त या छंद आधारीत गीत भुले नही जा सकते ,और उसको दादी मां और ही अपने प्यारसे अमर बना देती थी

    साक्षेप मी आजकल क्षात्र को अगर छंद बद्ध गीत गाना आसान हो जाता है तो प्रथाके विरुद्ध जानेका आग्रह करके हम उनको एक अच्छे रास्तेसे दूर नही रख रहे है ?

    क्या इसमे तथाकथित सेक्युलर विचारधारा हमें भारतीय मुलकी सब व्यवस्था ठुका

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  6. संजय सर



    ब्लोग चे नवीन कलर कोम्बिनेशन छान आहे आणि वाचायला स्पष्ट आणि सोपे वाटते

    याआधीचे जरा किचकट वाटत होते आणि वाचताना त्रास होत होता

    नवीन वर्षाची सुधारणा अभिनंदनीय आहे

    आपल्या ब्लोग वर आपण जे विविध विषय निवडता त्यामुळे खूपच ज्ञानात भर पडते आणि अत्यंत सोप्या पद्धतीने आमच्या सारख्या सामान्य लोकाना लोक शिक्षण मिळते हा या ब्लोग वाचण्याचा सर्वात मोठा फायदा आहे




    वंदनीय श्री शर्मा सरजी और श्री पानसे साहिब ,

    मैं मेरी भावनाए मराठीमे लिखना अच्छा समझते हुए संजय सरको भी नाव वर्षकी

    हार्दिक बढाई देती हुं



    नव वर्षाच्या सर्वांना हार्दिक शुभेच्छा !



    कूजन्तं रामरामेति च्या पुढे



    मधुरं मधुराक्षरम

    आरुह्य कविताशाखा वन्दे वाल्मिकी कोकिलम



    असे असून ती लोकप्रिय रामरक्षेतील ओळ आहे




    कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम

    आरुह्य कविताशाखा वन्दे वाल्मिकी कोकिलम

    असा तो श्लोक आहे

    कवितारुपी फांदीवर बसून राम राम असे मधुर बोल बोलणाऱ्या

    वाल्मिकी रुपी कोकिळेला माझे वंदन असो

    असा त्या श्लोकाचा अर्थ होतो

    जिभेला योग्य व्यायाम वळण आणि उच्चाराची शिस्त लागण्यासाठी जणू

    ह्याची रचना प्रत्येकाने आत्मसात करावी

    श्री अभिराम दीक्षित यांच्यासाठी -

    इतक्या उच्च प्रतीची रचना कुणी डॉ बाबासाहेब आंबेडकर यांच्यावर केल्यास त्यांचे अभिनंदन करण्यास सनातनी लोक मागे राहणार नाहीत हे मुद्दाम सांगावेसे वाटते

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  7. सर्वांना नववर्षाच्या हार्दिक शुभेच्छा!

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  8. नमस्कार सर, आपणास सुद्धा नवीन वर्षाच्या हार्दीक शुभेच्छा.
    छान ब्लॉग आहे.
    आपला "अमानुष एक थरार" मराठी चित्रपट मला विशेष आवडला.

    And totally agree with the slogan "One World One Nation"
    Have A Nice Life...!

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